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How diabetes weakens bones and joints

DIABETES: आजकल भागदौड़ वाली जीवनशैली के कारण सेहत संबंधी प्रॉब्लम्स भी तेजी से बढ़ रही है। ब्लड प्रेशर से लेकर डायबिटीज तक जैसी गंभीर समस्याएं भी अब आम हो गई हैं। डायबिटीज अब ऐसी समस्या बन चुकी है जो कम उम्र के लोगों को भी तेजी से दबोच लेती है। बता दें कि यह ऐसी बीमारी है जो किसी को एक बार घेर ले तो फिर धीरे-धीरे शरीर को कमजोर करने लगती है। जिससे शरीर को दूसरी बीमारियां तेजी से घेरती हैं। शरीर में शुगर लेवल बढ़ने पर इसे नियंत्रित कर पाना भी मुश्किल हो जाता है। डायबिटीज ब्लड शुगर को तो बढ़ावा ही है, साथ ही साथ बोन और ज्वाइंट्स को भी कमजोर करने लगता है। जिससे ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों के पतले होने, घिसने और अर्थराइटिस की समस्या में इजाफा हो सकता है। इससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और फ्रैक्चर और ज्वाइंट्स पेन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। जानते हैं डायबिटीज हड्डियों और ज्वाइंट्स को कैसे नुकसान पहुंचाता है-

विशेषज्ञ बताते हैं कि, मधुमेह न केवल ब्लड शुगर को बढ़ाता है, बल्कि यह हड्डियों और जोड़ों को भी कमजोर कर सकता है। जब शरीर में शुगर लेवल लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो यह हड्डियों में कैल्शियम की मात्रा को कम कर सकता है, जिससे वे कमजोर हो जाती हैं। इससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। अलावा इसके डायबिटीज के कारण जोड़ों में सूजन आ सकती है, जिससे दर्द और जकड़न फील होती है।

कई मामलों में, हाई ब्लड शुगर शरीर के टिशूज़ और कार्टिलेज को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे गठिया जैसी समस्याएं पनप सकती हैं। डायबिटीज से प्रभावित नसों और रक्त वाहिकाओं के कारण हड्डियों और जोड़ों में सही मात्रा में पोषण नहीं पहुंच पाता, जिससे ठीक होने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और छोटी चोटें भी जल्दी ठीक नहीं होतीं। लंबे समय तक अनकंट्रोल शुगर रहने से बोन मिनरल डेंसिटी कम हो जाती है, जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है, खासकर रीढ़, कूल्हों और घुटनों में।

डायबिटीज से ग्रस्त लोगों को अपनी हड्डियों और जोड़ों की देखभाल के लिए नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए, कैल्शियम और विटामिन-D युक्त आहार लेना चाहिए और शुगर लेवल को कंट्रोल में रखना चाहिए। अगर हड्डियों या जोड़ों में लगातार दर्द या जकड़न हो रही हो, तो इसे नजरअंदाज भूलकर भी ना करें और तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें। सही खान-पान, नियमित व्यायाम और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखकर हड्डियों को मजबूत रखा जा सकता है और जोड़ों की समस्याओं से निजात पाया जा सकता है।

हड्डियों और ज्वाइंट्स को कैसे प्रभावित करती है DIABETES?

How diabetes weakens bones and joints

डायबिटीज अब एक आम समस्या बन चुकी है, जिसकी सबसे बड़ा कारण है अनियमित लाइफस्टाइल और खान-पान। डायबिटीज हड्डियों और ज्वाइंट्स की सेहत को भी काफी प्रभावित करती है। आइये जानते हैं कि डायबिटीज हड्डियों और ज्वाइंट्स में किस तरह की समस्याएं उत्पन्न कर सकती है।

1. हड्डियों को बनाता है कमजोर

डायबिटीज हड्डियों के बनने और टूटने के बीच के संतुलन को बिगाड़ देती है, जिससे धीरे-धीरे हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है। इससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और आगे चलकर फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।

2. Joints Pain और अकड़न की समस्या

ब्लड शुगर यानी हाइपरग्लाइसेमिया से लंबे वक्त तक परेशान होने के कारण जोड़ों में सूजन की समस्या पैदा हो जाती है, जिससे जोड़ों में दर्द, अकड़न की शिकायत होने लगती है। इसलिए, व्यक्ति को अपने सामान्य दैनिक कार्य करने में भी कठिनाई होने लगती है।

3. घाव का देरी से भरना

डायबिटीज के कारण जिस तरह सामान्य बीमीरियों से उबरने में भी समय लग जाता है, उसी तरह चोटों के भरने में भी देरी होती है। डायबिटीज के चलते शरीर में ब्लड फ्लो प्रॉपर नहीं रहता, जिसके चलते फ्रैक्चर और जोड़ों की चोटों के ठीक होने में देरी होती है।

4. बढ़ जाता है ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा 

डायबिटीज के मरीजों में ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा ज्यादा होता है। खासतौर पर घुटनों में। इससे वजन बढ़ता है, सूजन होती है और जॉइंट्स को नुकसान पहुंचता है, जिससे जोड़ों में टूट-फूट की समस्या हो सकती है।

5. लिगामेंट इंजरी

ब्लड में ग्लूकोज के बढ़ने से लिगामेंट कमजोर होने लगता है, जिससे डायबिटिक व्यक्ति में ऐसी लिगामेंट इंजर की आशंका ज्यादा हो जाती है, जिसके लिए तत्काल उपचार की जरूरत होती है।

6. फ्रोजन शोल्डर

डायबिटीज के चलते एडहेसिव कैप्सूलाइटिस या फ्रोजन शोल्डर की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिसके कारण कंधे के जोड़ में असहनीय दर्द और अकड़न की समस्या पैदा हो जाती है।

डायबिटीज के मरीज इस तरह रखें हड्डियों की सेहत का ध्यान

How diabetes weakens bones and joints

डायबिटीज के पेशेंट्स को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि ये स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ा देती है। तो चलिए जानते हैं कि डायबिटीज के मरीजों को अपनी हड्डियों और जॉइंट्स कैसे ख्याल रखना चाहिए।

1. कैल्शियम-विटामिन युक्त भोजन का सेवन

अपनी हड्डियों और जॉइंट्स की सेहत का ख्याल रखने के लिए डायबिटीज के मरीजों को अपने खानपान का विशेष तौर पर ध्यान रखना चाहिए। ऐसे किसी भी खाद्य से दूर रहना चाहिए जो ग्लूकोज की मात्रा को तेजी से बढ़ाता है। डायबिटीज के मरीजों को कैल्शियम और विटामिन से भरपूर खाद्य का सेवन करना चाहिए।

2. ये चीजें करें डाइट में शामिल

डायबिटीज के मरीजों को अपनी डाइट में डेयरी प्रोडक्ट्स, मेवे, हरी पत्तेदार सब्जियां और अगर आप नॉन-वेजीटेरियन (Non-Vegetarian) हैं तो मछली का सेवन जरूर करना चाहिए। इससे बोन हेल्थ इंप्रूव होती है और हड्डियों और जॉइंट्स के दर्द में राहत मिलती है।

3. इन चीजों से रहें दूर

डायबिटीज के मरीजों को भूलकर भी चीनी और कार्बोहाइड्रेट से युक्त खाद्यों का सेवन नहीं करना चाहिए। क्रेविंग होने पर इसके अल्टरनेट तलाशें, लेकिन चीनी और कार्बोहाइड्रेट से दूर ही रहें।

4. रूटीन में बढ़ाएं फिजिकल एक्टिविटी

डायबिटीज के मरीजों में वजन तेजी से बढ़ने लगता है, जिससे हड्डियों और जॉइंट्स भी प्रभावित होते हैं। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को अपने रूटीन में पैदल चलना, फिजिकल एक्टिविटी और योग को शामिल करना चाहिए। इससे वजन बढ़ने का खतरा दूर होता है और बोन हेल्थ इंप्रूव होती है।

फोटो सौजन्य- गूगल

SKIN CARE: Applying this face pack twice a week will control aging

Skin Care: कुछ महिलाओं की स्किन महज 25 से 35 की उम्र में ही ढीली और लटकी सी नजर आने लगती है। त्वचा पर झुर्रियां आ जाती हैं। महीन रेखाएं दिखने लगती हैं। त्वचा से जुड़ी ये सारी समस्याएं जिनसे लोग बेहद परेशान हैं और जरूरी इलाज की खोज में रहते हैं। स्किन जब ढीली हो जाती है तो देखने पर साफ मालूम चलता है कि आपकी स्किन अब लूज हो चुकी है। काफी लोगों में ये प्रोब्लम्स देखने को मिलती है। आजकल कुछ कॉलेज जाने वाली लड़कियां भी लूज त्वचा की समस्या को ठीक कराने को लेकर कई सारे महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती हैं। इन प्रोडक्ट्स से दूसरे साइड इफेक्ट्स होने की आशंका बढ़ जाती है। इन परिस्थितियों में आपको अपनी स्किन के केयर के लिए कुछ प्राकृतिक उपायों को ट्राई करने चाहिए। आप फिटकरी का भी इस्तेमाल करके स्किन को कम उम्र में बूढ़ा लगने से बचा सकते हैं। आइये जानते हैं फिटकरी का कैसे करें इस्तेमाल-

त्वचा पर फिटकरी का इस्तेमाल करने के टिप्स

SKIN CARE: Applying this face pack twice a week will control aging

आप एक फिटकरी का टुकड़ा लें। इसे थोड़ा सा कूट कर पाउडर की तरह बना लें।अब इसे तवे पर डालें और गर्म करें। जब ये गर्म होने लगेगा तो फिटकरी से पानी निकलेगा। फिटकरी इस पानी में अपने सारे गुण छोड़ देती है। इसे अच्छी तरह से सुखा दें। इसे दोबारा से कूटना है और इसका पाउडर तैयार कर लेना है।

चेहरे पर लगाए घर पर तैयार किया हुआ फेस पैक

SKIN CARE: Applying this face pack twice a week will control aging

अब एक बाउल में दो छोटा चम्मच चावल का आटा लें। आधा छोटा चम्मच फिटकरी का पाउडर, 01 चम्मच एलोवेरा जेल, आधा छोटा चम्मच कॉफी, आधा चम्मच गुलाब जल डालें। इस मिश्रण को अच्छी तरह से मिला लें। अब आप इस पेस्ट को अपने चेहरे पर अच्छी तरह से अप्लाई करें। आप इसे गर्दन, हाथों, पैरों सभी जगह लगा सकते हैं। सिर्फ 15 मिनट इसे लगाकर छोड़ दें। उसके बाद पानी से चेहरे को अच्छी तरह से साफ कर लें। इसे आप हफ्ते में दो बार इस्तेमाल कर सकते हैं।

फोटो सौजन्य- गूगल

Don't let your skin turn colorless in the colors of Holi

HOLI के अवसर पर चेहरे पर गुलाल और हाथों में पिचकारी ना हो तो फिर मजा ही क्या? लेकिन रंगों के इस खास त्योहार का लुत्फ उठाने के चक्कर में अपने त्वचा पर पड़ने वाले प्रभाव को भूल जाते हैं। आसमान में उड़ता गुलाल जहां वातावरण को मदमस्त बनाता है तो वहीं चेहरे के बढ़ते रफनेस का भी कारण होता है। ऐसे में स्किन को इन बैड इफेक्ट से बचने के लिए कुछ स्किन केयर टिप्स को जरूर फॉलो करना जरूरी है। इससे स्किन का लचीलापन बना रहता है और त्वचा क्लीन वा क्लीयर दिखने लगती है। जानते हैं स्किन के ग्लो को बरकरार रखने के लिए होली से पहले इन टिप्स को करें फॉलो-

स्किन पर रंगों का प्रभाव

इस बारे में स्किन केयर विशेषज्ञ का कहना है कि पारंपरिक तरीके से खेली जाने वाली होली में फूलों और उससे तैयार रंगों से होली खेली जाती थी। मगर आधुनिकता के इस दौर में सिंथेटिक पिगमेंट का इस्तेमाल त्वचा को नुकसान पहुंचा रहा है। इससे स्किन और आंखों पर जलन और बालों का रूखापन बढ़ने लगता है। इसके अलावा लंबे समय तक धूप में होली खेलने से स्किन टैनिंग और टैक्सचर प्रभावित होने का जोखिम बढ़ जाता है। कुछ आसान प्री होली टिप्स से स्किन को रंगों के नुकसान से बचाया जा सकता है।

इन प्री होली स्किन केयर टिप्स को करें फॉलो

1. स्किन को हाइड्रेट रखें

रंगों के त्योहार होली में तेज़ धूप चेहरे को नुकसान पहुंचाती है और निर्जलीकरण का जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे में शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पानी अवश्य पीएं। इसके अलावा हेल्दी पेय पदार्थों का भी सेवन करें। इससे पसीने के कारण होने वाले फ्लूइड लॉस से बचा जा सकता है।

2. ठंडे पानी से चेहरे को धोएं

ओपन पोर्स की समस्या के कारण रंग स्किन की लेयर्स में पहुंचकर इंफेक्शन और सूजन का कारण साबित होता है। इसके अलावा मुहांसों का भी खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में पोर्स को संकुचित करने याबंद करने के लिए ठंडे पानी में चेहरे को डिप करें या फिर बर्फ को चेहरे पर रगड़ें। इससे ओपन पोर्स से बचा जा सकता है

3. बादाम का तेल करें इस्तेमाल

Don't let your skin turn colorless in the colors of Holi

 

स्किन को फ्री रेडिकल्स और हार्मफुल केमिकल से बचाने के लिए प्रोटेक्टिव लेयर की आवश्यकता होती है। इसके लिए बादाम के तेल की लेयर को चेहरे पर अप्लाई कर लें। इससे स्किन पर दाग धब्बों की समस्या हल हो जाती है। साथ ही चेहरे पर रंग चिपकने के खतरे से भी बचा जा सकता है। होली खेलने से पहले बादाम के तेल को नारियल के तेल में मिलाकर चेहरे, गर्दन और बाजूओं पर अप्लाई करें।

4. पेट्रोलियम जेली लगाएं

पेट्रोलियम जेली की एक परत लगाने से आपकी त्वचा हाइड्रेटेड और सुरक्षित रहती है। इससे त्वचा पर रंगों का प्रभाव कम हो जाता है, जिसके चलते त्वचा पर जलन और खुरदरापन कम होने लगता है। इससे होंठ, गर्दन, कान और आंखों के नीचे की त्वचा सुरक्षित रखने में मदद मिलती है। इन जगहों से रंग को निकालना बेहद मुश्किल हो जाता है।

5. बाजूओं को ढककर रखें

पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने से आपके शरीर को अधिक मात्रा में रंग के संपर्क में आने से बचाया जा सकता है। इसके अलावा बालों को दुपट्टे, बंदाना या स्कार्फ से कवर कर लें। दरअसल, रंग के संपर्क में आने से त्वचा पर केमिकल का प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे स्किन की शुष्कता बढ़ने लगती है।

6. सनस्क्रीन करें इस्तेमाल

Excessive use of sunscreen is harmful, do not forget to do it before sleeping at night

तेज़ धूप से स्किन को बचाने के लिए नियमित रूप से सनस्क्रीन इस्तेमाल करें। इससे त्वचा पर टैनिंग का खतरा कम होने लगता है और स्किन सेल्स बूस्ट होते हैं। सन प्रोटेक्शन फैक्टर यानि एसपीएफ का अवश्य ध्यान रखें और उसकी वेल्यू 50 रखने से एज़िग के प्रभाव से भी मुक्ति मिल जाती है। इससे त्वचा पर रंगों के प्रभाव से भी बचा जा सकता है।

7. ऑर्गेनिक कलर लगाएं

ऑर्गेनिक और केमिकल फ्री रंग त्वचा को जलन से बचाने और स्वस्थ त्वचा बनाए रखने में मदद करते हैं। ये पक्के और केमिकल युक्त रंगों के समान कई दिनों तक त्वचा पर नहीं ठहरते है। इससे स्किन मुलायम रहती है।

फोटो सौजन्य- गूगल

On International Women's Day, gift trendy jewellery

International Women’s Day: अंतराष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 08 मार्च को मनाया जाता है। महिलाओं के लिए यह दिन बहुत ही स्पेशल होता है क्योंकि उन्होंने ही हमारी जिंदगी को खास होने का एहसास कराया है। उनमें सबसे ऊपर हैं मां फिर बहन, पत्नी, बेटी और दोस्त, उनके प्रति प्यार और सम्मान जाहिर करने के मकसद से इससे अच्छा दिन कोई हो नहीं सकता। अगर आप अपनी जिंदगी में महिलाओं के लिए कुछ खास करने का सोच रहे हैं तो उन्हें ज्वेलरी तोहफे में दें। शायद ही कोई ऐसी महिला होगी, जिसे ज्वेलरी पसंद न हो। इसी के कारण आज हम आपको यहां ज्वेलरी के कुछ विकल्प देने जा रहे हैं, ताकि आप भी कुछ ट्रेंडी खरीद कर महिला दिवस को सेलिब्रेट कर सकें।

पर्सनलाइज्ड नेम ज्वेलरी

On International Women's Day, gift trendy jewellery

अपनी जिंदगी की सबसे स्पेशल महिला को अगर आप कुछ यूनिक और इमोशनल गिफ्ट देना चाहते हैं, तो नेम पेंडेंट या कस्टमाइज्ड ब्रेसलेट बेस्ट ऑप्शन है। इसमें उनके नाम, जन्मतिथि, या कोई खास मैसेज लिखवा सकते हैं।

मिनिमलिस्ट ज्वेलरी

International Women's Day

हर दिन पहनने के लिए आप सिंपल ज्वेलरी का चयन आप तोहफे के रूप में कर सकते हैं। इसके लिए आप डेलिकेट गोल्ड या सिल्वर चेन खरीद सकते हैं। अगर बजट कम है तो स्मॉल हूप इयररिंग्स तोहफे में दें।

स्टेटमेंट ज्वेलरी

International Women's Day

ये ज्वेलरी उन महिलाओं को काफी पसंद आती है जो रॉयल लुक कैरी करती हैं। इसके लिए चंकी गोल्ड चेन नेकलेस परफेक्ट विकल्प है। कुछ हैवी लेना है तो मल्टी लेयर नेकलेस ले सकते हैं।

ब्रेसलेट हैं बढ़िया विकल्प

International Women's Day

कुछ ऐसा तोहफा देना है जिसे रोजाना पहना जा सके तो चार्म ब्रेसलेट अच्छा विकल्प है। ऐसे ब्रेसलेट में छोटे-छोटे प्यारे चार्म्स (हार्ट, स्टार या नेम) लगे होने चाहिए। ये नहीं तो सोने या चांदी का कड़ा भी आप खरीद सकते हैं।

फोटो सौजन्य- गूगल

RAMZAN is the month of self-control and self-restraint

RAMZAN: रमजान इस्लाम धर्म का पवित्र महीना है। इस्लामिक कैलेंडर के इस नौवें महीने में मुसलमान रोजे यानी उपवास रखते हैं। इस दौरान कुरान पढ़ते हैं। पांच बार की नमाज अदा करते हैं और अल्लाह की इबादत करते हैं।

बता दें कि चांद नज़र आने के साथ ही रमजान का पाक महीना शुरू हो गया है। मुस्लिम समुदाय के लोग आज पहला रोजा रख रहे हैं और कुरआन, नमाज व तरावीह का एहतमाम करते हैं। रमजान इस्लामिक कैलेंडर का 9वां महीना है, जिसे बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि इसी महीने 610 ईस्वी में मोहम्मद साहब को लेयलत उल-कद्र की रात पवित्र कुरआन शरीफ का ज्ञान प्राप्त हुआ था, इसलिए इस महीने में रोजा रखने की परंपरा है। यह महीना इबादत, ध्यान और दान-पुण्य के किए जाना जाता है। 30 दिन के रमज़ान के अंत में ईद-उल-फितर मनाया जाता है।

RAMZAN is the month of self-control and self-restraint

बरकत का महीना माह-ए-रमजान के पूरे महीने मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखते हैं। रोजा रखने वाले व्यक्तियों की अल्लाह द्वारा उसके सभी गुनाहों की माफी दी जाती है। इसलिए हर एक मुसलमान के लिए रमजान का महीना साल का सबसे विशेष माह होता है। इस्लाम धर्म की मान्यताओं के मुताबिक रमजान का महीना खुद पर नियंत्रण और शांत रखने का महीना होता है। गरीबों के दुख-दर्द को समझने के लिए रमजान के महीने में मुस्लिम समुदाय द्वारा रोजा रखने की परंपरा है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार रमजान के महीने में रोजा रखकर दुनिया में रह रहे गरीबों के दुख-दर्द को महसूस किया जाता है। रोजा आत्म संयम व आत्म सुधार का प्रतीक रोजे के दौरान संयम का तात्पर्य है कि आंख, नाक, कान, जुबान को नियंत्रण में रखा जाना क्योंकि रोजे के दौरान बुरा नहीं सुनना, बुरा नहीं देखना और ना ही बुरा बोलना जाता है। इस तरह से रमजान के रोजे मुस्लिम समुदाय को उनकी धार्मिक श्रद्धा के साथ-साथ बुरी आदतों को छोड़ने के अलावा आत्म संयम रखना सिखाते हैं। इसके साथ ही यह भी मान्यता है कि गर्मी में रोजेदारों के पाप धूप की अग्नि में जल जाते हैं तथा मन पवित्र हो जाता है। सारे बुरे विचार रोजे के दौरान मन से दूर हो जाते हैं।

आज रखा गया पहला रोजा

RAMZAN is the month of self-control and self-restraint

अकीदतमंदों ने रविवार को पहला रोजा रखा है। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार, रमजान नौंवा महीना होता है। रोजा रखने के साथ रात में तरावीह की नमाज पढ़ी जाती है। पांच वक्त की नमाज के साथ कुरान की तिलावत करते हैं।

तीन भागों में बंटा रमजान

रमजान का यह महीना तीन भागों में बंटा होता है यानी एक से लेकर 10 दिनों तक रहमत का अशरा होता है, तो 11 से लेकर 20 तक बरकत का और 21 से लेकर 30 रोजे तक मगफिरत होता है। पवित्र रमजान माह में इबादत का काफी महत्व होता है। यही वजह है कि लोग इबादत के साथ-साथ जकात भी निकालते हैं। जकात का अर्थ होता है जमा पूंजी का दो अथवा ढाई प्रतिशत जरूरतमंदों में दान करना।

फोटो सौजन्य- गुगल

Apart from PHYSICAL RELATION

PHYSICAL RELATION: जीवन में जिस तरह प्यार जरूरी है वैसे ही अपने पार्टनर के साथ रिश्ते में गर्माहट के लिए सेक्स भी अहम है। अगर आपका पार्टनर रिश्ते को मजबूती देना चाहता है तो वह एक कदम आगे बढ़ते हुए फिजिकल भी होना पसंद करेगा, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सेक्स को तरजीह नहीं देते! क्या आप भी अभी अपने रिश्ते में सेक्स के लिए आमादा नहीं हैं? या फिजिकल रिलेशन से कुछ दिन परहेज रखना चाहती हैं? लेकिन पूरी तरह से फिजिकल इंटिमेसी में गैप नहीं लाना चाहती हैं तो इसमें कुछ जरूरी गतिविधियां आपको मदद पहुंचा सकती हैं।

कई ऐसी रोमांटिक गतिविधियां हैं, जो इंटरकोर्स के बिना भी आप दोनों के बीच फिजिकल इंटिमेसी को बनाए रखने में आपकी मदद कर सकती है। अगर आप इन गतिविधियों से वाकिफ नहीं हैं, तो अधिक परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, हम आपको इसकी जानकारी देंगे। प्राइमस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की गायनेकोलॉजी और ऑबस्टेशन डिपार्टमेंट की कंसल्टेंट डॉ रश्मि बालियान ने बिना सेक्सुअल इंटरकोर्स के फिजिकल इंटिमेसी मेंटेन रखने के कुछ खास तरीके बताए हैं। तो चलिए जानते हैं इस बारे में अधिक विस्तार से..

जानें बिना इंटरकोर्स के दौरान फिजिकली करीब होने के तरीके

1. एक-दूसरे को ऐसे करें कडल

Apart from PHYSICAL RELATION

हाथ पकड़ें, गले लगें या बिस्तर पर एक-दूसरे के करीब बैठें। बिना किसी और चीज़ के एक-दूसरे को छूने और करीब होने का आनंद लें। जब आप सोने जाएं, तो अपने पार्टनर के साथ लिपटकर एक-दूसरे को करीब से महसूस करने की कोशिश करें। कडल करने से न केवल इंटिमेसी बढ़ती है, बल्कि स्ट्रेस रिलीज करने में भी मदद मिलती है। रोजाना पार्टनर के साथ काम से लौटने के बाद कडल करें।

2. KISS करने का बदले तरीका

Apart from PHYSICAL RELATION

अगर आप बिना सेक्स किए इंटिमेट होना चाहती हैं, तो एक-दूसरे को किस करना एक अच्छा आईडिया है। अलग-अलग तरह से चूमे, अगर आपको समझ नहीं आ रहा है, तो अपने पार्टनर से उनकी किस से जुड़ी डिजायर पूछें और उसके अनुरूप उन्हें किस करें। आप फ्रेंच किस, लेपर्ड किस या स्पाइडरमैन किस भी आज़मा सकती हैं। इस तरीके का प्रयोग करें, इससे आपको इंटिमेसी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

3. बॉडी मसाज है बढ़िया विकल्प

Apart from PHYSICAL RELATION

एसेंशियल फ्रैगनेंस वाले ऑयल या लोशन का उपयोग करके, बारी-बारी से एक-दूसरे के शरीर की मालिश करें। आप एक-दूसरे के शरीर के कितने हिस्से की मालिश करते हैं, यह आपकी सीमाओं पर निर्भर करता है, अगर आप इससे ज़्यादा मालिश करने के लिए तैयार नहीं हैं, तो आप सिर्फ़ एक-दूसरे की गर्दन और पीठ की मालिश कर सकती हैं। कुछ सुगंधित मोमबत्तियां जलाएं और सुकून भरा संगीत बजाकर मूड सेट करें।

अपने पार्टनर को अच्छा महसूस कराने के लिए आपको प्रोफेशनल मसाज सीखने की जरूरत नहीं है। केवल मालिश के दौरान पार्टनर से पूछती रहें, उन्हें कैसा लग रहा है? या आप किस तरह की मालिश एंजॉय करना चाहते हैं, या आपके किस अंग को ज्यादा आराम की जरूरत है। इस तरह आराम भी मिलता है, तनाव कम होता है साथ ही आप दोनों एक दूसरे के करीब आते हैं।

4. एक-दूसरे को डूबकर करें स्पर्श

Take care of these 5 things for better climax on bed

पार्टनर के शरीर के उन हिस्सों को स्पर्श करें और चूमें जो आमतौर पर सेक्स के दौरान ध्यान आकर्षित नहीं करते हैं, जैसे उनके पैर, पेट या पीठ। अपने पार्टनर के शरीर को एक्सप्लोर करने का आनंद लेने के लिए समय निकाले। ये आप दोनों को फिजिकल इंटिमेसी मेंटेन करने में मदद करती है, साथ ही आप रोमांस के लिए सिर्फ सेक्स पर निर्भर नहीं रहती। अगर आप बिना नेकेड हुए बॉडी एक्सप्लोर करना चाहती हैं, तो शरीर के नजर आने वाले पार्ट्स जैसे की हाथ, पैर, गर्दन, चेहरा आदि को चूमे और उनका आनंदमय स्पर्श करें।

5. बाउंड्री में रहकर करें रोमांस

Some Natural Ways To Spice Up Your Sex Life

नियम बनाने से न केवल आपको अपनी सीमाओं का पालन करने में मदद मिलेगी, बल्कि यह चीज़ों को और भी सेक्सी बना देगा। आपको अपनी बाउंड्री में रहकर रोमांस करना होता है, और मन होने पर भी आगे बढ़ने से खुदको रोकना है। ये नॉटी और सेक्सी रोमांस आप दोनों के बीच इंटिमेसी बढ़ाने में मदद करेगा। ऐसे नियम बनाएं, जिनसे आप और आपके पार्टनर दोनों सहज हों, इसके बाद इसे एंजॉय करें।

फोटो सौजन्य- गूगल

The water coming out of the taps of houses is giving rise to CANCER

CANCER: आज बुजुर्गों की बात बिल्कुल सच हो गई कि एक दिन वो भी आएगा जब हमें पानी को छान (फिल्टर) कर पीना पड़ेगा। उन्होंने जो कहा वह आज सच साबित हो चुका है और फिल्टर का पानी हमारे स्वस्थ जीवन के लिए काफी जरूरी है, वजह कई सारे हैं जिनके कारण अब ग्राउंड वाटर भी हमारे पीने लायक नहीं रहा पर क्या आप को मालूम है कि इससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी तक हो जाने का खतरा है? ऐसे जानलेवा खतरों से बचने के लिए हम कौन सा तरीका इस्तेमाल कर सकते हैं।

टैप के पानी से CANCER का खतरा!

जर्नल ऑफ एक्सपोजर साइंस एण्ड इन्वायरमेन्टल एपिडेमोलोजी की एक रिपोर्ट के मुताबिक हमारे घरों में टैप से गिरने वाले पानी में ऐसे परमानेंट एलीमेंट्स पाए जाते हैं जो कैंसर के लिए एक बड़ी वजह हैं। रिपोर्ट एक स्टडी के आधार पर है और उसके नतीजों के अनुसार, ऐसे लोग जो टैप वाटर को पीने में या खाना बनाने में इस्तेमाल करते हैं, उनमें कैंसर का खतरा 33 फीसदी तक बढ़ जाता है। रिपोर्ट में आगे है कि दुनिया भर की लगभग 45 फीसदी आबादी इसकी जद में है। कैंसर के ये खतरा वाकई बड़ा भी है फिर भी इसके बगैर हमारा काम एक दिन भी नहीं चल सकता।

टेप के पानी में कैंसर पैदा करने वाले एलीमेंट्स

The water coming out of the taps of houses is giving rise to CANCER

1.आर्सेनिक (Arsenic)

आर्सेनिक एक खतरनाक केमिकल एलीमेंट है जो प्राकृतिक रूप से जमीन के अंदर पाया जाता है। अगर टैप के पानी में आर्सेनिक की मात्रा ज्यादा हो तो ये कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। वैसे तो आर्सेनिक कुदरती जल सोर्स में ही पाया जाता है लेकिन ये स्टोर किये गए पानी में भी जन्म ले सकता है, खासकर तब जब पानी की सफाई का इंतेजाम न हो।

3.क्लोरीन (Chlorine)

कैंसर हॉस्पिटल के अनुसार, क्लोरीन का इस्तेमाल पानी को साफ करने के लिए किया जाता है। लेकिन पानी में ज्यादा क्लोरीन के होने से कुछ नुकसान देने वाले केमिकल एलीमेंट्स बन सकते हैं, जिन्हें डिसिन्फेक्टन बायप्रोडक्ट्स (DBPs)कहा जाता है। इनमें से कुछ केमिकल्स जैसे डायक्लोरोसाइनोफिन (Dichloramine) और ट्राइहैलोमिथेन (Trihalomethanes) कैंसर को बढ़ावा दे सकते हैं।

4.लेड (Lead)

लेड एक मेटल है जो पुराने पाइपलाइन और हमारे घर के नलों में हो सकती है। लिड अगर पानी में ज्यादा मात्रा में तो ये हमारे शरीर में जमा होने लगता है। इसकी वजह से पहले ट्यूमर और बाद में कैंसर तक के भी खतरे देखे जाते हैं।

क्या पानी से बढ़ रहा है कैंसर का खतरा

The water coming out of the taps of houses is giving rise to CANCER

1.लॉंगटाइम एक्सपोजर

डॉक्टर कहते हैं कि इन खतरों के बावजूद ये कहना भी सही है कि टैप के पानी से कैंसर का खतरा तब ही ज्यादा होगा जब हम इसे ज्यादा इस्तेमाल में लाएं। ज्यादा से मेरा मतलब लंबे समय तक। अगर पानी में आर्सेनिक, फ्लोराइड, या लिड जैसी चीजें हैं और हम उन्हें लगातार पीते हैं तो ये धीरे-धीरे शरीर में जमा होने लगते हैं और इस वजह से शरीर में कैंसर जन्म लेता है।

2. केमिकल रिएक्शन का शरीर पर असर

ये आप जानते होंगे कि पानी को साफ करने के लिए भी कुछ केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है। कई बार तो ये तरीका सही होता है लेकिन जब बिना जाने कि पानी के अंदर कौन से नुकसानदायक एलीमेंट्स हैं, किसी केमिकल के जरिए उसे साफ करने की कोशिश की जाती है तो केमिकल रिएक्शन होने के चांस होते हैं। ये केमिकल रिएक्शन शरीर में असर छोड़ते है और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों तक भी पहुंचा सकते हैं।

बचाव के उपाय

1. पानी का टेस्ट करवाएं

सबसे पहला कदम है, पानी की क्वालिटी टेस्ट करना। आप लोकल अथॉरिटी से बोल कर अपने घर आ रहे पानी की क्वालिटी के बारे में पूछ सकते हैं। पानी का टेस्ट करने की भी रिक्वेस्ट डाल सकते हैं ताकि आपको पता लगे कि आपके पानी में कौन से एलीमेंट्स ऐसे हैं जो नुकसान दे रहे हैं। कई बार अगर ये काम लोग प्राइवेटली भी कराते हैं।

2. फिल्टर का इस्तेमाल करें

अगर आपके पानी में आर्सेनिक, लेड, फ्लोराइड या अन्य हानिकारक एलीमेंट्स हैं तो एक अच्छा पानी फिल्टर लगवाना बेहद जरूरी है। आजकल बाजार में कई प्रकार के वाटर फिल्टर्स उपलब्ध हैं जो इन खतरनाक तत्वों को पानी से निकाल सकते हैं। ऐसे फिल्टर्स का चुनाव करें जो इन तत्वों को आसानी से और पूरे तरीके से हटाने में सक्षम हों।

3. पानी उबाल कर पियें

अगर आपके इलाके के पानी में आर्सेनिक या लिड की समस्या है तो पानी उबालने से वह कुछ हद तक सुरक्षित हो सकता है क्योंकि पानी को उबालने से बैक्टीरिया और वायरस खत्म हो जाते हैं। हालांकि, ये सही है कि उबालने से पूरी तरह पानी के एलीमेंट्स हट जाएं इसकी गारंटी नहीं है लेकिन यह जरूर है कि उबालने से पानी कुछ हद तक साफ जरूर हो सकता है।

4. नई पाइप का इस्तेमाल

अगर आपके घर में पुराने पाइप हैं तो उसे बदल देना चाहिए। पाइप जितना पुराना होगा, उसमें लेड जैसे खतरनाक एलीमेंट्स के होने का खतरा उतना ही होगा। अलावा इसके अपको इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि आपके घर पानी जिस सोर्स से आ रहा हो, उसकी पाइपलाइन भी बहुत पुरानी न हो। अगर ऐसा है तो पानी गरम कर के या फ़िल्टर कर के ही पियें।

5. पानी के श्रोत का रखें ध्यान

आपके लिए यह जानना जरूरी है कि आप जो पानी पी रहे हैं या खाना बनाने में इस्तेमाल कर रहे हैं, वो कहां से आ रहा है। अगर वो किसी सुरक्षित जगह से नहीं आ रहा जो साफ है तो फिल्टर्ड मिनरल वाटर का इस्तेमाल करें।

why Valentine Day is celebrated?

VALENTINE DAY: मोहब्बत का पर्व यानी वेलेंटाइन वीक अभी चल रहा है। पूरी दुनिया में हर वर्ष फरवरी महीने में एक हफ्ते प्रेमी-प्रेमिकाओं के नाम कर दिया जाता है। इस हफ्ते को वेलेंटाइन वीक कहते हैं। जिसका हर एक दिन आशिकों को एक दूसरे के करीब लाता है। वेलेंटाइन वीक की शुरुआत 07 फरवरी से होती है, जो 14 फरवरी को वेलेंटाइन पर खत्म होती है। इस बीच रोज डे से लेकर प्रपोड डे और प्रोमिस डे समेत कई ऐसे दिनों को सेलिब्रेट किया जाता है जो कपल को एक दूसरे के और नजदीक लाता है। पर क्या आप जानते हैं कि वेलेंटाइन डे क्यों मनाया जाता है? वेलेंटाइन हफ्ते का हर दिन क्यों स्पेशल है? जानते हैं क्यों और कैसे वेलेंटाइ न डे मनाने की परंपरा की शुरुआत हुई?

वैलेंटाइन डे की शुरुआत संत वैलेंटाइन के सम्मान में हुई थी, जिन्होंने प्रेम और विवाह के लिए संघर्ष किया था। वैलेंटाइन डे को 06 दिन पहले से मनाया जाता है, ताकि वैलेंटाइन डे पर लव परवान चढ़ें। वैलेंटाइन डे से पहले 07 फरवरी से 14 फरवरी तक वैलेंटाइन वीक मनाया जाता है। इस पूरे हफ्ते में अलग-अलग दिनों का विशेष महत्व होता है, जो प्रेम को अलग-अलग तरीकों से व्यक्त करने का अवसर देते हैं।

वैलेंटाइन वीक का हर दिन है कुछ खास

रोज़ डे (ROSE DAY)

7 फरवरी को रोज डे मनाते हैं । इस दिन प्यार और भावनाओं को व्यक्त करने के लिए गुलाब का आदान-प्रदान किया जाता है। जिसमें लाल गुलाब प्रेम, पीला गुलाब मित्रता, सफेद गुलाब शांति और गुलाबी गुलाब आभार दर्शाता है।

प्रपोज डे (PROPOSE DAY)

Valentine Day Special: Do not give these 5 gifts to your partner even by mistake

दूसरे दिन यानी 8 फरवरी को प्रपोज डे मनाया जाता है। यह दिन उन लोगों के लिए खास होता है जो अपने प्रियजन को अपने प्यार का इज़हार करना चाहते हैं। इस दिन शादी के लिए भी प्रपोज किया जाता है।

चॉकलेट डे (CHOCOLATE DAY)

प्यार में मिठास घोलने के लिए चॉकलेट डे मनाया जाता है और अपने प्रिय को चॉकलेट दी जाती है। इसका वजह है कि चॉकलेट खुशी और स्नेह का प्रतीक मानी जाती है।

टेडी डे (TEDDY DAY)

10 फरवरी को टेडी डे मनाते हैं। इस दिन टेडी बियर गिफ्ट किया जाता है, जो मासूमियत और प्यारे एहसास का प्रतीक है। खासकर लड़कियों को यह दिन बहुत पसंद आता है।

प्रॉमिस डे (PROMISE DAY)

11 फरवरी को प्रॉमिस डे मनाया जाता है। इस दिन प्रेमी एक-दूसरे से सच्चे प्रेम, ईमानदारी और विश्वास की कसमें खाते हैं। रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए यह दिन बेहद खास होता है।

हग डे (HUG DAY)

वैलेंटाइन डे के छठे दिन हग डे मनाया जाता है। हग डे पर एक प्यार भरी झप्पी (गले लगाना) प्यार, समर्थन और सुरक्षा का अहसास कराती है। यह दिन दिखाता है कि एक स्नेह भरी झप्पी से हर दर्द मिट सकता है।

किस डे (KISS DAY)

13 फरवरी को किस डे मनाया जाता है। यह दिन प्यार और गहरे रिश्ते की निशानी माना जाता है। एक किस स्नेह, प्रेम और आत्मीयता को दर्शाती है।

वेलेंटाइन डे (VALENTINE’S DAY)

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14 फरवरी को वैलेंटाइन डे मनाया जाता है। यह दिन इश्क का होता है। इस दिन प्रेमी एक-दूसरे के लिए खास गिफ्ट, फूल और प्यार भरे संदेश देते हैं। कई लोग इस दिन डेट पर जाते हैं, तो कुछ शादी या रिश्ते को मजबूत करने का वादा करते हैं।

क्यों मनाया जाता है वैलेंटाइन डे?

यह दिन संत वैलेंटाइन की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने तीसरी शताब्दी में रोम में प्रेम और विवाह को लेकर में आवाज बुलंद की थी। उस समय सम्राट क्लॉडियस द्वितीय ने सैनिकों के विवाह पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन संत वैलेंटाइन ने सेक्रेट तरीके से प्रेमी जोड़ों का विवाह कराया। जब राजा को यह पता चला, तो उन्होंने संत वेलेंटाइन को 14 फरवरी को मृत्युदंड दे दिया। उनकी याद में यह दिन प्यार की पहचान, इश्क के इजहार का दिन बन गया।

These 6 habits can create tension in every relationship

Relations: हमारे जीवन की एक सच्चाई यह है कि उसे भी गुजर जाना है। लेकिन सबसे अधिक परेशानी लेकर आता है बुढ़ापा। ऐसा समय जब हम बीमारियों से भी घिरे रहते हैं और रिश्ते की डोर भी समय के साथ कमजोर होने लगती है। इसका बड़ा कारण कुछ आदतें होती हैं जो हमने अपने जीवन में वर्षों पहले से लगा रखी होती हैं। हम आपको कुछ ऐसी ही आदतों के बारे में बताने जा रहे हैं जो आप पहले से छोड़कर अपने उस समय के लिए अपने रिश्तों को और मजबूत कर लेंगे जब आपको उन रिश्तों की सबसे ज्यादा जरूरत होगी, यानी आप के बुढ़ापे में।

6 आदतें जिन्हें छोड़ना है रिश्ते की गारंटी

1. उम्मीद अधिक लगाना

पति-पत्नी के बीच संवाद जरूरी

साइकोलॉजिस्ट और रिलेशनशिप कंसल्टेंट के मुताबिक हम अक्सर रिश्तों में ज्यादा उम्मीदें रख लेते हैं, ये सोचकर कि अगर सामने वाला हमारी तरह नहीं सोचे या वही ना करे जो हम चाहते हैं, तो रिश्ता खराब हो जाएगा। लेकिन, ये आदत हमारे रिश्ते में बहुत तनाव पैदा कर सकती है। जब हम अपने साथी से ज्यादा उम्मीदें रखते हैं और उन्हें बदलने की कोशिश करते हैं, तो इसका उल्टा असर होता है। यह सिर्फ हमारे पार्टनर को असंतुष्ट करता है, बल्कि रिश्ते में भी दूरी आ सकती है।

ऐसे में उस वक्त के लिए अभी से तैयारी करें जब आप बैठकर केवल सोच सकेंगे कि क्या सोचा और क्या पाया। अगर आप अपनी उम्मीदों को थोड़ा कम करेंगे और अपने साथी की अच्छाइयों को मानेंगे, तो न सिर्फ रिश्ता मजबूत होगा, बल्कि आप दोनों के बीच प्यार और समझ भी बढ़ेगा और वो लंबे समय तक आपके साथ चलेगा।

2. छोटी छोटी बातों को नजरंदाज न करें

Study on Relationship

कभी-कभी हम रिश्तों में छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं, जैसे एक हल्की मुस्कान, एक अच्छा शब्द या बस एक छोटा सा इशारा। ट्यूटर चेज नाम की एक संस्था की रिपोर्ट कहती है कि स्वस्थ रिश्ता रहने के लिए पार्टनर्स के बीच गेस्चर्स का आदान प्रदान जरूरी है। ये छोटी बातें रिश्ते में बहुत मायने रखती हैं और इनसे रिश्ते में खुशियां और मजबूती आती है। अगर हम इनका ध्यान नहीं देते, तो ये छोटे-छोटे इशारे रिश्ते में दूरियां बना सकते हैं। और ये आप अगर अभी से नहीं करेंगे तो उस उम्र में जब आप को रिश्तों की जरूरत होगी, इसकी शुरुआत तब नहीं हो सकेगी और तब शुरुआत करने पर भी गेस्चर्स अपना काम करें, मुश्किल है।

3. दूसरों की गलतियों को बार-बार याद करना

Study on Relationship

उम्र बढ़ने के साथ अक्सर लोगों में यह आदत होती है और आपको अगर बुजुर्ग होने पर ऐसा नहीं बनना तो उसकी शुरुआत आज से करें ताकि आपकी आदतों में ये शामिल हो सके। हैप्पी फेमिली नाम की एक संस्था के लिए डॉक्टर जस्टिन कॉल्सन ने लिखा है कि यह पैटर्न बहुत आम तौर पर पाया गया है कि ऐसे रिश्ते जो टूटे या फिर कमजोर हुए हैं, उसमें दोनों तरफ से एक दूसरे की ग़लतियों को दोहराने का पैटर्न था।

यहां यह समझना है कि हर इन्सान से गलतियां होती हैं, और रिश्तों में यह सामान्य बात है कि कभी न कभी कोई न कोई गलती करेगा। लेकिन अगर आप हमेशा उन गलतियों को याद करेंगे और पुराने बातों को ताज़ा करेंगे, तो यह रिश्ते में तनाव ही बढ़ाएगा। उस उम्र में जब आपको रिश्ते की जरूरत होगी तो आपके इर्द गिर्द लोग आने से परहेज कर सकते हैं।

4. सुनने की आदत न होना

Sleep Separation: Separation of bedroom for a long time causes distance in relationships

हममें से कई लोग अपनी बातों को ज्यादा अहमियत देते हैं और सामने वाले की बातों को नजरअंदाज कर देते हैं। यही आदत रिश्तों में खटास पैदा करती है। रिश्ते तभी अच्छे होते हैं जब दोनों एक-दूसरे को सुनते और समझते हैं। लाइफ काउंसिलिंग इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट कहती है कि न सुनना, किसी भी रिश्ते के अंत की शुरुआत हो सकता है। तो अगर आप भी चाहते हैं कि आपका रिश्ता मजबूत हो, तो अब से पहले सामने वाले की बात पूरी तरह से सुनें।

जल्दी से प्रतिक्रिया देने के बजाय, उनकी बातों को समझने की कोशिश करें। जब आप अपने साथी की बातों को अहमियत देंगे, तो वह भी आपके विचारों की कद्र करेगा। इससे न सिर्फ आपका रिश्ता मजबूत होगा, बल्कि आप दोनों के बीच समझ और नज़दीकी भी बढ़ेगी। यह नजदीकी उस वक्त आपके ज्यादा काम की होगी जब आपको अपने साथी या किसी रिश्ते की जरूरत होगी और आपको प्यार चाहिए होगा।

5. वक्त नहीं है, मत बोलिए

Sleep Separation: Separation of bedroom for a long time causes distance in relationships

हम अक्सर यह बहाना बनाते हैं कि समय की कमी है, खासकर जब हम काम में व्यस्त होते हैं या और कोई जिम्मेदारियां होती हैं। लेकिन अगर हम यही सोचने लगें कि हमारे पास समय नहीं है, तो इससे रिश्तों में दूरी आ सकती है और फिर आप अकेलेपन का शिकार होने लगेंगे।

आप यह सोचिए कि उस वक्त जब आप अपनी उम्र के ऐसे पड़ाव पर हों जहां आप शारीरिक तौर पर भी कुछ कमजोर हों और आपको मानसिक मजबूती के लिए भी रिश्ते चाहिए हों। लेकिन न सुनने की आदत की वजह से आपने तो रिश्ते गंवा दिए हैं। फिर उस उम्र में आप मुश्किल में होंगे। इसलिए सबसे पहले वक्त की कमी का बहाना बना कर रिश्तों को टालना छोड़ दें।

6. नकारात्मक सोच रखना

Relation

एक रिपोर्ट कहती है कि अगर आप हमेशा हर चीज़ को नकारात्मक तरीके से देखते हैं, तो यह आपके रिश्तों में तनाव पैदा कर सकता है। जब हम हर बात में परेशानी ढूंढ़ते रहते हैं, तो रिश्ते में प्यार और समझ की कमी होने लगती है। एक्सपर्ट के मुताबिक उम्र के उस पड़ाव पर जब हम सीख लेते हैं कि हमें क्या नहीं करना, जहां हमारे पास रिश्तों में खुद को बदलने का वक्त होता है तो यह हमारे लिए लाइफटाइम का वरदान बन जाता है। पॉजिटिव सोच की उम्र के उस पड़ाव पर सबसे ज्यादा जरूरत होती है जब हम उम्र के उस पड़ाव पर हों जहां हमें शारीरिक तौर पर दिक्कत हो सकती है। और अगर ऐसे में हम नकारात्मक रहे तो रिश्ते भी प्रभावित होंगे और हम खुद किसी भी बीमारी या समस्या से लड़ नहीं सकते।

फोटो सौजन्य- गुगल

When there is a delay in periods, apart from pregnancy

PERIODS: किशोर अवस्था के मद्देनजर गर्भावस्था तक महिलाओं के जिंदगी में शारीरिक और मानसिक तौर पर बहुत कुछ चलता रहता है। पीरियड्स भी इन्हीं प्रक्रियाओं में से एक है। किसी को एक से ज्यादा पीरियड्स भी होते हैं तो किसी को 07, ये हर महिलाओं की उनकी शरीरिक बनावट की वजह से बदलते रहते हैं। कुछ महिलाओं के पीरियड्स अनियमित होते हैं। वहीं, कुछ को पीरियड्स जल्दी होने की समस्या से दो चार होना पड़ता है।

अगर एक बार पीरियड्स थोड़ा जल्दी हो जाएं तो यह चिंता की बात नहीं है लेकिन यह लगातार हो रहा है तो यह आपके लिए स्वास्थ्य को लेकर अलर्ट रहने का वक्त है। आपका पीरियड्स आपकी वर्तमान पीरियड्स के पहले दिन से शुरू होता है। इसकी समाप्ति अगले पीरियड्स के पहले दिन होती है। औसतन, एक चक्र 21 से 39 दिनों के बीच होता है। इसलिए आपके द्वारा ब्लीड किए जाने वाले दिनों की संख्या भी अलग-अलग होती है।

अगर आपकी पीरियड्स साइकिल या चक्र 21 दिनों की है, तो यह एक चिंताजनक बात है और आपको इस बदलाव को नज़रंदाज़ नहीं करना चाहिए। क्योंकि ये आपके शारीरिक स्वास्‍थ्‍य के बारे में बहुत कुछ बताता है।

यहां हैं जल्‍दी पीरियड्स आने के लिए 9 अहम वजह

1. प्रीमेनोपॉज़

जैसा कि नाम से पता चलता है, यह रजोनिवृत्ति से पहले के पीरियड्स हैं। आम तौर पर ये मध्य-चालीसवें या बाद के वर्षों में शुरू होता है। ज्यादातर मामलों में चार साल तक चलता है। इस समय के दौरान, हार्मोन के स्तर में भारी उतार-चढ़ाव देखा जाता है। जिससे हर महीने ओव्यूलेशन नहीं हो सकता। इससे अनियमित या पीरियड 18 दिन या 21 दिन पर भी हो सकते हैं।

2. इंटेंस एक्सरसाइज

आप सोच सकती हैं कि जिम में व्यायाम करना आपके शरीर की मदद कर रहा है। पर, हर चीज में संतुलन की जरूरत होती है। बहुत जोरदार व्यायाम आपके पीरियड्स को रोक सकता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जो एथलीटों में सबसे अधिक देखी जाती है।

यहां तक ​​कि अगर पीरियड्स बंद नहीं होते हैं, तो यह जल्दी पीरियड्स होने का कारण बनता है। उचित ऊर्जा के बिना, आपका शरीर सामान्य तरीके से ओव्यूलेट करने के लिए पर्याप्त मात्रा में हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाएगा।

3. वजन में उतार-चढ़ाव

ज्यादातर केस में, आपके पीरियड में कोई भी बदलाव आपके वजन से जुड़ा होता है। चाहे, तेजी से वजन घट रहा हो या बढ़ रहा हो, आपके हार्मोन पर प्रभाव डाल सकता है। जब ऐसा होता है, तो आपके पीरियड्स प्रभावित हो जाते हैं। जिससे आपको समय से पहले ही माहवारी (Early periods) हो सकती है।

4. तनाव का स्तर आपके हार्मोन पर डाल सकता है प्रभाव

How can you take care of your wife or girlfriend during periods?

तनाव के बारे में बात किये बिना कोई भी सूची कैसे पूरी हो सकती है?आपके तनाव का स्तर आपके हार्मोन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। जिससे अनियमित पीरियड्स हो सकते हैं। कारण कोई भी हो, खुद को तनाव मुक्त करने के तरीके खोजें।

5. हार्मोनल बर्थ कंट्रोल

गर्भनिरोधक गोलियों में मौजूद हार्मोन, ओव्यूलेशन और आपके पीरियड्स पर सीधा प्रभाव डालते हैं। यदि आप नियमित रूप से गर्भनिरोधक गोलियां लेती हैं, तो आपकी अगले पीरियड का समय इस बात पर निर्भर करेगा कि आपके चक्र के दौरान आपने गोलियां लेना कब शुरू किया था।

इसके अलावा, अंतर्गर्भाशयी उपकरणों जैसे विकल्प भी मासिक धर्म चक्र अनियमितताओं का कारण बन सकते हैं, लेकिन केवल शुरुआती दो से तीन महीनों में।

6. पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम)

पीरियड्स जल्दी होने के लिए एक और कारण पीसीओएस या पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम है, जो प्रत्येक 10 महिलाओं में 01 को प्रभावित करता है। असल में, यह बहुत सी महिलाओं में अनियंत्रित हो जाता है। जब तक कि वे बेबी प्‍लान नहीं करते। PCOS के कुछ सबसे सामान्य लक्षणों में अनियमित पीरियड्स, मिस्ड पीरियड्स, मुंहासे, वजन बढ़ना और शरीर पर अत्यधिक हेयर ग्रोथ शामिल हैं।

7. एंडोमेट्रियोसिस

यह मासिक धर्म विकार तब होता है जब ऊतक जो आपके गर्भाशय को लाइन करता है वह गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगता है। इस स्थिति में, महिलाएं केवल अनियमित पीरियड्स से नहीं गुजरती हैं, बल्कि मासिक धर्म में गंभीर ऐंठन, पीठ के निचले हिस्से में दर्द और सेक्स के दौरान दर्द का अनुभव करती हैं।

8. अनियंत्रित मधुमेह

जब मधुमेह का समय पर निदान नहीं किया जाता है, तो रक्त शर्करा का स्तर सामान्य से बहुत अधिक होता है। साल 2011 में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि टाइप 02 मधुमेह वाली महिलाओं में अनियमित पीरियड्स थे।

9. थायराइड की बीमारी

यह माना जाता है कि आठ में से एक महिला को अपने जीवनकाल में थायरॉयड की समस्या होगी। जब थायरॉयड ग्रंथि ठीक से काम नहीं करती है, तो आपका चयापचय और मासिक धर्म चक्र अनियंत्रित हो जाता है। ज्यादातर मामलों में, पीरियड्स सामान्य से काफी हल्के होते हैं और जल्दी आते हैं। अप्रत्याशित रूप से वजन बढ़ना या कम होना भी इसका एक कारण है।

फोटो सौजन्य- गूगल